STORYMIRROR

aazam nayyar

Abstract Fantasy Children

4  

aazam nayyar

Abstract Fantasy Children

फूल

फूल

1 min
380

मुहब्बत में यहाँ रुस्वा करे कोई 

मुझे ऐसे यहाँ देखा करे कोई 


असर ऐसा मगर हो दोस्ती का ही 

यहाँ हो वो मुझे ढूंढ़ा करे कोई 


नहीं उसके गया हूँ घर मगर मैं फ़िर 

मुझी से ही हंसी पर्दा करे कोई


दिया है फूल जिसको वफ़ा का ही 

वफ़ा में रोज़ अब धोखा करे कोई 


अकेला था बहुत मैं अंजुमन में ही 

न मेरे रु ब रु चेहरा करे कोई


वहां जाकर नगर उसके मिलेगा क्या 

 न देखे रास्ता तेरा करे कोई 


मिले ऐसा हंसी वो हम सफ़र आज़म 

मुहब्बत का मगर वादा करे कोई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract