Rashmi Ranjan
Abstract
रेगिस्तान में उगते फूल
कैसे भी हों
देते हैं, मन को सुकून
आंखों में चमक
और एक हौसला
पैरों के छाले को
सतत चलते रहने का
कि वो फूल भी होते हैं
नागफनी और बबूल के।
वक्त
सपने
स्त्री हूं......
भटकता इंसान
आगत वर्ष
स्वयं की खोज
फूल
एक यात्रा
आ रहे हो कान्...
पौधे और मैं
जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस धर्म दस द जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस ...
चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते। चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते।
इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई। इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई।
मुझे हराने के लिए तुमने, मुझे बहुत दुश्वारियां दी, अब क्या सोचा है, जीतने से कैसे रोको मुझे हराने के लिए तुमने, मुझे बहुत दुश्वारियां दी, अब क्या सोचा है, जीतने से ...
अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्रियां ? अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्र...
मैं और कुछ नहीं जानती बस इतना जानती हूँ कि उसने प्रेम किया था। मैं और कुछ नहीं जानती बस इतना जानती हूँ कि उसने प्रेम किया था।
हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया । हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया ।
जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो। जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो।
रामराज्य का हमें भी तो कम से कम एक बार दर्शन कराओ। रामराज्य का हमें भी तो कम से कम एक बार दर्शन कराओ।
पल- पल बढ़ते कदमों से, पल पल बदल जाती है। पल- पल बढ़ते कदमों से, पल पल बदल जाती है।
रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी पीठ थपथपाया रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी ...
इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व। इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व।
ज़िंदगी कब सरल थी हुई, कब मैं इतनी विरल थी हुई ज़िंदगी कब सरल थी हुई, कब मैं इतनी विरल थी हुई
पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो। पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो।
दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है। दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है।
आधी शक्ति युग दुनिया की अर्ध नारीश्वर का ब्रह्माण्ड। आधी शक्ति युग दुनिया की अर्ध नारीश्वर का ब्रह्माण्ड।
कौन नहीं वाचाल है, क्यों मुझ पर आरोप। शब्दों का भंडार है, किससे कम यह तोप।। कौन नहीं वाचाल है, क्यों मुझ पर आरोप। शब्दों का भंडार है, किससे कम यह तोप।।
लेकिन मेरा यकीं करो, मैंने सुनी है चीख उन पंछियों की जिनके पर कतर दिए गए : लेकिन मेरा यकीं करो, मैंने सुनी है चीख उन पंछियों की जिनके पर कतर दिए गए :
दिल तो देता है दलीलें हमें समझाता है, दर्द भीतर से निचुड़ने से मना करता है। दिल तो देता है दलीलें हमें समझाता है, दर्द भीतर से निचुड़ने से मना करता है।
जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया । जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया ।