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Shilpi Goel

Abstract Fantasy Inspirational

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Shilpi Goel

Abstract Fantasy Inspirational

फरमाईश

फरमाईश

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मेरे दिल ने की है मुझसे छोटी सी फरमाइश,

कभी तो पूरी कर दो मेरी भी कोई ख्वाहिश।

मैंने दिल से पूछा आखिर क्या चाहते हो तुम,

क्यों हररोज एक नई दस्तक दे जाते हो तुम।

फिर जो उसका जवाब मुझ तक आया,

सोचने पर मैंने खुद को मजबूर पाया।

क्यों अब तक किया मैंने दिल को अपने नजरंदाज,

काश बनाया होता उसको अपनी खुशियों का पहरेदार।

उसकी तो बस एक छोटी सी माँग थी,

मैंने यूँ ही लगा दी उसको एक डाँट थी।

चाहा था उसने गुमी हुई खुशियों को पाना,

जिससे चारों तरफ हो मुस्कुराहट का खजाना।

नहीं पूरी हो पाई उसकी यह छोटी सी फरमाईश,

टूट गया बेचारा दिल,अधूरी रह गई उसकी ख्वाहिश।

मेरे दिल का था बस इतना सा फसाना,

जिसे मैंने ना समझा और ना ही जाना।

वो गाता रहा होकर बस दीवाना,

मुट्ठी में बंद है तेरी खुशियों का खजाना।

जिसे मैंने ना खोला ना ही पहचाना,

मुझपर यूँ ही हँसता रहा सारा ज़माना।


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