STORYMIRROR

Priya Tiwari

Romance Fantasy Others

3  

Priya Tiwari

Romance Fantasy Others

फर्क पड़ता है

फर्क पड़ता है

1 min
152

फर्क पड़ता है,

जब दिखाती हूं की,

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.....!!!!!


बहुत दर्द होता है,

जब दिखाती हूं,

कोई दर्द नहीं होता......!!!!!!


बहुत कुछ कहना हो,

तो ओढ़ लेती हूं खामोशी....!!!!!


पास आना चाहती हूं तो,

खुद को खींच लेती हूं.....!!!!!!!


खुद को तेरी समझने,

की कोशिशों में......!!!!!!!!


तुझसे दूर कितने,

रोड़े अटकाती हूं.......!!!!!!


फिर खुद ही लगा देती हूं इल्जाम,

कि तू तो मुझे समझता ही नहीं है.....!!!!!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance