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Akanksha Gupta (Vedantika)

Abstract

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Akanksha Gupta (Vedantika)

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पहली मुलाकात

पहली मुलाकात

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मैं सुनाऊँ आज आपको अपने मन की बात

कैसे हुई होगी दादा दादी की पहली मुलाकात

शादी के प्रस्ताव को हुए जो दादाजी तैयार

लेकर के रिश्ता चले दादाजी पहुंचे दादीजी के द्वार


हुई आवभगत खूब दादाजी के मन के फूल खिले

होगा अब साक्षात्कार उनसे यह सोचकर चैन मिले

लेकिन थीं बंदिश परम्पराओं की उंस विवाह के मार्ग में

नहीं था वह ज़माना उदार जो दे हाथों को हाथ मे


हृदय आकुलित हो रहा था दादीजी का भी उनका दर्शन पाने को

कैसे कहे उद्गार हृदय के और क्या समझाए ज़माने को

सखियों से सुन-सुनकर किस्से घबराहट का तूफ़ान उठे

जाने कैसा होगा जीवनसाथी सवाल हजार बार करे


संशय मिटे हृदय के विवाह वेदी को करते हुए पार

अब शुरू होने जा रहा था उनका एक नया सँसार

बिन कुछ बोले कर लिये एक दूसरे से वादे हजार

मेरे लिए तो ऐसी होगी दोनों की पहली मुलाकात!


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