STORYMIRROR

Awadhesh Kumar

Tragedy

3  

Awadhesh Kumar

Tragedy

पहला प्यार

पहला प्यार

1 min
314

यूँ ही नंगे पैर दौड़ लेता हूँ,

तेरे मुहल्लों की उन गलीयों से,

जहाँ शरमा कर तू बैठी थी,

तिरछी निगाहें कर अखियों से,

वो गलियां तो है पर वो अखियां कहाँ,

यादें तो है पर तेरा शरमाना कहाँ,

वनवास है ये गांव ये कहा था तूने,

राम तो है पर सीता कहाँ...


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy