Awadhesh Kumar
Abstract Classics Inspirational
वो मेहनत की रोटी बड़ी खा़स सी,
आधी भी खाई तो क्या बात है,
जो बांट के खाई उसे आधी भी,
तो नूर-ए-खु़दा तेरे भीतर भी है।
~दर्द
तलब
~पहला पन्ना
हिचकी
कोरोना की दुन...
~ख़ुदा
9 बजे 9 मिनट
नशा
आँखों की साज़...
यादें
भक्तों के हो तुम बहुत प्यारे कष्ट सभी के हरते सारे भक्तों के हो तुम बहुत प्यारे कष्ट सभी के हरते सारे
तुम्हें लगा मेरी मेहनत क्या गुल खिला पायेगी रोक सको तुम मेरे हौसले ताकत कहाँ से आएगी तुम्हें लगा मेरी मेहनत क्या गुल खिला पायेगी रोक सको तुम मेरे हौसले ताकत कहाँ ...
मेघों की गर्जन झरने की झरझर सब समाया इन्हीं सात सुरों में। मेघों की गर्जन झरने की झरझर सब समाया इन्हीं सात सुरों में।
संघर्षों से लड़कर जीतना आपने हमें सिखाया, ज्ञान ज्योति देकर हमारा जीवन आसान बनाया, संघर्षों से लड़कर जीतना आपने हमें सिखाया, ज्ञान ज्योति देकर हमारा जीवन आसान ब...
राज़ दफ़न करने की ज़रूरत नहीं होती, हम बच्चे जो बन गए होते हैं। राज़ दफ़न करने की ज़रूरत नहीं होती, हम बच्चे जो बन गए होते हैं।
आंखों के सपने बस कुछ यूं चूर चूर हो गए युवा मारे मारे फिर रहे आंखों के सपने बस कुछ यूं चूर चूर हो गए युवा मारे मारे फिर रहे
अब तो इस जीवन से भी डर लगता है क्योंकि रोज रोज, पल पल तिल तिल कर जी रहा हूँ अब तो इस जीवन से भी डर लगता है क्योंकि रोज रोज, पल पल तिल तिल कर जी रहा ह...
सदा बहाव रक्त में जमाव हो असत्य का । घिराव घेर व्यूह में घुमाव हो असत्य का ।। सदा बहाव रक्त में जमाव हो असत्य का । घिराव घेर व्यूह में घुमाव हो असत्य का ।।
एक अविश्वसनीय संबंध भी है, जिसे सिर्फ ढोना भर नहीं है जीवन भर निभाना है, एक अविश्वसनीय संबंध भी है, जिसे सिर्फ ढोना भर नहीं है जीवन भर निभाना है,
प्रकृति के कण कण में घुलना था रच बसना था. प्रकृति के कण कण में घुलना था रच बसना था.
अशब्द वो कुभाव युक्त पेज को हि फाड़ दो । भरे घड़ा कुपाप जो वही घड़ा लताड़ दो ।। अशब्द वो कुभाव युक्त पेज को हि फाड़ दो । भरे घड़ा कुपाप जो वही घड़ा लताड़ दो ...
कहीं हरियाली तो कही पानी कहीं पेड़ों के रंग, ऐसा अनोखा रंग बता रब कैसे धरा को मिला है। कहीं हरियाली तो कही पानी कहीं पेड़ों के रंग, ऐसा अनोखा रंग बता रब कैसे धरा को ...
मेहनत करता शरीर चुस्त दुरुस्त होता करता वो सब काम मेहनत करता शरीर चुस्त दुरुस्त होता करता वो सब काम
अंधविश्वास कुरीति त्यागे, प्रेम सत्य को अपनाये। अंधविश्वास कुरीति त्यागे, प्रेम सत्य को अपनाये।
और सुबह सा मुस्कराता कोई चेहरा आहिस्ता आहिस्ता करीब आ रहा है। और सुबह सा मुस्कराता कोई चेहरा आहिस्ता आहिस्ता करीब आ रहा है।
पानी के बिन कहाँ होता जीवन, कहाँ होती रौनक, पानी के बिन कहाँ होता जीवन, कहाँ होती रौनक,
ए मेरे हमसफ़र नही सूझे जिंदगी का डगर, जो तू न हाथ थाम लेता कैसे कटता सफ़र। ए मेरे हमसफ़र नही सूझे जिंदगी का डगर, जो तू न हाथ थाम लेता कैसे कटता सफ़र।
ख़ामोश रहना सिर्फ आदत नहीं बल्कि एक पृष्ठभूमि तो है ही. ख़ामोश रहना सिर्फ आदत नहीं बल्कि एक पृष्ठभूमि तो है ही.
पंत से पल्लवित होती प्रथा सी, महादेवी की नीर भरी व्यथा सी, पंत से पल्लवित होती प्रथा सी, महादेवी की नीर भरी व्यथा सी,
आकर्षक इतनी संस्कृति इसकी, खिंचा चला आए यहांँ जग सारा। आकर्षक इतनी संस्कृति इसकी, खिंचा चला आए यहांँ जग सारा।