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Awadhesh Kumar

Romance

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Awadhesh Kumar

Romance

~दर्द

~दर्द

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यूं ही धूप में नंगे पैर,

दौड़ के आया ना करो 


मेरी साइकिल की घंटी,

सुनने के वास्ते,


तेरी आंखों की

तलब मुझे ही है


पर तेरे पांव छत से

लगकर जल जाते होंगे।


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