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Awadhesh Kumar

Abstract

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Awadhesh Kumar

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यादें

यादें

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सूना है वो पेड़ जहां झूले थे हम दो,

ख़ाली है वो चबूतरा जहां बैठे थे हम दो,


चेहरे मुझसे भी हैं चेहरे तुझसे भी हैं,

पर वैसा नहीं जिसमें हम ही हम हों।


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