STORYMIRROR

Amit Kumar

Inspirational

4  

Amit Kumar

Inspirational

पहल

पहल

1 min
21

आओ पहल करें

एक ऐसी पहल

जो सब करना चाहते हैं

लेकिन कुछ विरले ही

इसकी शुरुआत कर पाते हैं


करम करना तो

हमारा परम् धर्म है

किन्तु धर्म का कर्म

करने में कोई बुराई नहीं

अपितु कर्म को धर्म से

जोड़ने में बुराई है


यह एक अभावपूर्ण

नाज़ुक वक़्त है जो

जल्द ही गुज़र जाएगा

जैसे खुशबू

फूलों से होकर गुज़रती है

मीठे पानी के झरने


पहाड़ों के दहानों से

गिरकर गुज़रते है

हवा पेड़ो और प्रकृति से

होकर गुज़रती है

ठीक वैसे ही यह पल भी

गुज़र जाएंगे


बस हमें संयम और सब्र से

काम लेना होगा

सुरक्षित रहने का सिर्फ

एकमात्र तरीका है

हमें संयमित रहना होगा


जहां भी रहे टिककर रहना होगा

जहां है वहां एहतियातन रहना होगा

एक दूसरे से मैं तुम्हारे साथ हुँ

इस मुसीबत के घड़ी में

यह ज़रूर मुस्कुराहट के


साथ हमें कहना होगा

यह मुस्कुराहट ही हमारी ढाल है

कुदरत का भी यह कैसा कमाल है

परिन्दें आज़ाद है

इंसान परिंदों सा क़ैद है

यह एहसास है इंसान को


अपनी दरिंदगी को कुछ कम करने 

या फिर समाप्त करने का

संकेत है प्रकृति का मानव के लिए

अब नही सुधरे तो

दूसरा मौक़ा फिल्मों में मिलता होगा

यहाँ बिल्कुल भी नही मिलेगा


अभी भी वक़्त है सम्भल जाओ

सुधर जाओ नही तो

जान से जाओगे

जब जान ही न रहेगी

तो फिर किसके मज़े उड़ाओगे


बड़े बुजुर्गों ने कहा है

बुद्धिजीवियों ने भी कहा है

हमारे शास्त्रों ने भी कहा है

जान है तो जहान है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational