फ़क़ीर
फ़क़ीर
एक हरकत सूनी कहीं पर
जो बरक़त की बात करती है
सुना है दोस्तों की मुहब्ब्त से
ज़िंदगी - ज़िंदगी बनती है
जहाँ चार यार मिल जाए
दर बस वो खुदा सा है
सुना है दोस्त जिसका वक़्त हो
वो आसरा दुआ सा है
मैं खुशनसीब हूँ जो
दोनों तरह से मालामाल हूँ
मतलबों से और मतलबियो से
कोसों दूर हूँ और
बिन मतलब का यार हूँ
गर यारी निभाना मतलबी है
किसी उदास चेहरे को मुस्कान देना
मतलबी होना है तो
मैं बहुत मतलबी हुँ
मेरा मतलब सिर्फ इतना है
यार सुख से रहे
मुस्कुराते रहे ताउम्र
उनके दुखों को खुदाया कम करें
उनकी तमाम मुसीबतों को खुदाया
किसी माँ की दुआ सा नम करें
वो दर भी महक उठे
जो मेरे यारों के दर से मिले
उनकी ज़िंदगी खिलखिला उठे
जिन्हें मेरे यारों का सँग मिले
वहीं मेरा जोश है
वहीं मेरा जूनून है
मेरे बुजुर्गो के साथ
वहीं मेरे सब कुछ है
उनकी ही आहटें है
जो देती है राहतें
दोस्त जिसके पास है
वो शख्स दुनियां में बहुत अमीर है
यह समझ लेना बस
वहीं मजनू की लैला है
वहीं रांझे की हीर है
जिसके दिल में प्यार है
वहीं सच्चा फ़क़ीर है।
