STORYMIRROR

Jaypoorna Vishwakarma

Tragedy

3  

Jaypoorna Vishwakarma

Tragedy

फिर भी मैं पराई हूँ

फिर भी मैं पराई हूँ

1 min
401

बाबुल का घर छोड़ 

पिया अपने घर आई हूँ

फिर भी मैं पराई हूँ


बचपन खेला था जिस आंगन में 

जिस आँचल ने पाला था 

मां की ममता, पिता का प्यार 

भाई-बहन का दुलार


सुखचैन सब जिसने दे डाला था 

अर्पण कर दिया जिसने 

अपना सारा जीवन 

छोड़ उस बाबुल का उपवन

पिया तेरे मधुवन में आई हूँ

फिर भी मैं पराई हूँ।


मांगा जो भी धन-दौलत सम्मान 

पूर्ण किया सब तेरी मांग 

सब लेकर मैं आई 


सीता बन सावित्री मैं लक्ष्मी स्वरूपा 

तेरे घर आई मैं सुंदरी रूपा 

करके समर्पण अपना जीवन 

तेरी अर्धांगिनी मैं कहलाई हूँ

फिर भी मैं पराई हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy