फेरों से ही नहीं मिली सकी
फेरों से ही नहीं मिली सकी
रहना सहना साथ-साथ पर मन है काफी दूर
शांति और सुख उन रिश्तों में होते चकनाचूर।
जीवन भर के लिए किसी का तभी थामना हाथ
आपस में यदि तालमेल हो मन का मन के साथ।
अर्थहीन हैं वे गठबंधन ऐसे फेरे सात
खींचतान खटपट में गुजरें यदि उनके दिन रात।
बनीं और बदली हैं दुनिया में विवाह की रीति
सबका ही अभिप्रेत युगल में बनी रहे दृढ़ प्रीत।
पूरब या पश्चिम सबके ही अपने रीति विधान
उचित नहीं कि स्वयं को कोई कहता फिरे महान।
प्रणय-रीतियां रोक न पाईं भेद भरे व्यवहार
भोग-वस्तु दासीवत नारी पर नर का अधिकार।
फेरे ही तो नहीं विश्व में परिणय की पहचान
रीति गौण है प्रणय-प्रेम है कुदरत का वरदान।
मानवीय पावन रिश्ते हों, युगलों में हो प्यार
फेरों से ही नहीं मिल सकी नैतिकता को धार।
