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Manju Rai

Inspirational

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Manju Rai

Inspirational

फौजी की अभिलाषा

फौजी की अभिलाषा

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मेरे महबूब मेरे वतन ,

मेरी तू आन है ए वतन ,

तुझपे कुर्बान मेरी ,

जान औ तन ,

मेरे महबूब मेरे वतन।

तेरी मिट्टी में जन्मा ,

पला बढ़ा मैं ,

कर्ज दार तेरा मैं ,

शिश कटा कर भी ,

फर्ज़ निभाऊँगा ए वतन ,

मेरे महबूब मेरे वतन।

तेरा आँचल न छूने पायेगा कोई ,

हस्ती मिट जायेगी पल में उसकी ,

तिरंगे की आन की खातिर ,

लहू के आखिरी कतरे तक लडेंगे हम ए वतन ,

मेरे महबूब मेरे वतन।

यही अभिलाषा है आखिरी ,

दोबारा जन्मे इसी मिट्टी में हम,

तेरा प्यार ऐसा मिले ,

गुल बन के इसी मिट्टी में खिले ,

नदिया बने ,पेड़ औ पहाड़ बने ,

हर रूप में तेरी सुरक्षा करूँ ए वतन ,

मेरे महबूब मेरे वतन।

मेरे महबूब मेरे वतन ,

मेरी तू आन है ए वतन ,

तुझपे कुर्बान मेरी ,

जान औ तन ,

मेरे महबूब मेरे वतन।


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