फौजी की अभिलाषा
फौजी की अभिलाषा
मेरे महबूब मेरे वतन ,
मेरी तू आन है ए वतन ,
तुझपे कुर्बान मेरी ,
जान औ तन ,
मेरे महबूब मेरे वतन।
तेरी मिट्टी में जन्मा ,
पला बढ़ा मैं ,
कर्ज दार तेरा मैं ,
शिश कटा कर भी ,
फर्ज़ निभाऊँगा ए वतन ,
मेरे महबूब मेरे वतन।
तेरा आँचल न छूने पायेगा कोई ,
हस्ती मिट जायेगी पल में उसकी ,
तिरंगे की आन की खातिर ,
लहू के आखिरी कतरे तक लडेंगे हम ए वतन ,
मेरे महबूब मेरे वतन।
यही अभिलाषा है आखिरी ,
दोबारा जन्मे इसी मिट्टी में हम,
तेरा प्यार ऐसा मिले ,
गुल बन के इसी मिट्टी में खिले ,
नदिया बने ,पेड़ औ पहाड़ बने ,
हर रूप में तेरी सुरक्षा करूँ ए वतन ,
मेरे महबूब मेरे वतन।
मेरे महबूब मेरे वतन ,
मेरी तू आन है ए वतन ,
तुझपे कुर्बान मेरी ,
जान औ तन ,
मेरे महबूब मेरे वतन।
