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Padma Motwani

Abstract

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Padma Motwani

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पैसा

पैसा

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पैसे की है दुनिया सारी 

पैसे पर सब बलिहारी।

पैसा ही है पीर पैगंबर 

पैसे पर सब जाते वारी।


पैसे से ही बच्चे का बचपन

रात दिन होती है खनखन।

पैसे से ही रहती दीवानगी

मिल जाती हर परवानगी।


पैसे के दम पर संसार है

इसका उसका व्यवहार है।

भाई भाई में भी तकरार है

पिता की परवरिश दुश्वार है।


पैसा किस्मत का है खेल 

यह होता हाथ की मेल।

गुरूर न करना पैसे का

बड़ा तमाशा इस पैसे का।



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