पैसा
पैसा
पैसों से पागल हुए,'मान' आज इंसान।
मरती दिखती मनुजता,दिखती झूठी शान।।
धन के पीछे अहर्निश,भाग रहा इंसान।
पीछे-पीछे मौत भी,लेने आती जान।।
मानव माया जाल में,उलझ गया है आज।
भगवन को तो भूलकर,करता धन पर नाज।
मैल हाथ का साथियो,धन को लें सब मान ।
इसका गर्व न कीजिए,गुण का हो गुणगान।।
ईश्वर इतना दीजिए,जितना चाहे 'मान'।
सबको करदूँ प्यार से,पल भर में धनवान।।
