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हरीश कंडवाल "मनखी "

Classics

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हरीश कंडवाल "मनखी "

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पापा की शान है बेटियां

पापा की शान है बेटियां

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बिटिया तेरी हर नादानी अच्छी लगती

दिल भी अठखेलियां करता जब तू हँसती

तेरी हर सोखियां तेरी हर अदा दिल को भाती

बिटिया तेरी हर शैतानी मुझे अच्छी लगती।।

दुनिया की नजरों में तुम लड़की हो

मगर मेरी नजरो में तुम मेरे घर की शान हो

क्या फर्क है बेटी और बेटे में दोनों में तो वही जान

मुझको जब तुम प्यार से गले लगाती


बिटिया तुम्हारी हर वो तोतली बात मुझे लुभाती।।

तुम खिलखिला कर हंसो जी भरकर मुस्कराओ

तुम अपने नन्हे कदमो से पूरी दुनिया घूम कर आओ

तुम्हारे जी मे जो आये करना

इस दुनिया को अपनी ताकत दिखाना

मेरे दिए गए संस्कारो को तुम कभी मत भूलना।।

तुम्हारा ये नादान बचपन निश्छल प्यार

तुमारी हर अदा पर उमड़ता है प्यार

गर्व रहेगा मुझे तुम पर कि तुम्हे जो हमने पाया

बिटिया बनकर तुमने मनखी को कलम चलाना सिखाया।।


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