ओ सन्देश भाई !!!
ओ सन्देश भाई !!!
यूँ ही डटे रहिए आप
अपने पायदान पर...
ध्यान रहे कि आपके कदम
कहीं डगमगाये न, ओ सन्देश भाई !!!
अपनी सोच का 'दायरा' महज़
'उस' मंज़िल तक ही सीमित न रखकर,
उससे भी आगे निकल चलने की
तैयारियों में पूरे जोश-ओ-खरोश से
लग जाइये, ओ सन्देश भाई !!!
इतना तो तय है कि
अगर आपने पूरी सत्यनिष्ठा से
अपने कर्तव्यों का पूर्ण निर्वाहन किया,
तो आपको परखने वाले बेशक़
आपका स्वागत करेंगे, ओ सन्देश भाई !!!
अपनी 'नकारात्मक' सोच पर
जल्द क़ाबू पाइये, ओ सन्देश भाई !!!
आवेश में आकर कभी आप
भूल कर भी अपनी धारणाओं को
महफ़िलों में अनायास ही
उजागर न कर दिया करें,
वरना आनेवाले वक़्त में
आपकी अनचाही मुश्किलें
और भी बढ़ सकतीं हैं...
बाक़ी आप पर निर्भर करता है
कि आप स्वयं क्या चाहते हैं, ओ सन्देश भाई !!!
