"नयी दीवाली"
"नयी दीवाली"
माना नहीं है संभव ये भी,
हो एकत्र एक जगह सभी,
पर इसमें भी है समझ नयी,
ज़रा दिल खोल कर समझो तो सही!
समझना है दीवाली का असल अर्थ,
लक्ष्मी को न करके व्यर्थ,
पावन मन से दीप जले,
जीवन से हो दूर अनर्थ!
पटाखों से न प्रदूषण होगा,
शांत मनोहर वातावरण होगा,
बेशक लोगों की भीड़ न हो,
पर मन में सच्चा आगमन हो!
दिखावे का त्यौहार नहीं,
दिलों का हर वार हो,
वाक़ई में मन के रावण जले,
हर घर अब राम हो!
नया ये भी नया वो भी,
सब कुछ नया तो ले आते है,
त्योहारों के नाम पर,
असल में बस दिखावा अपनाते है!
आओ मनाये इस वर्ष दीवाली,
हर दिल में जगे एक ज्योत निराली,
दिखावों से दूर मानवता की लाली,
घर-घर फैले रंगीन खुशहाली!
दीपों की लड़ियों से,
हँसी की फुलझड़ियों से,
मन की मिठास से,
पवित्र प्रेम की प्यास से,
गणेश लक्ष्मी के वास से,
राम-सीता के साथ से,
दिया बाती के प्रकाश से,
एकता के अटूट विश्वास से,
कुरीतियों के नाश से,
दुष्टों के विनाश से,
अपनों के एहसास से,
रिश्तों की मिठास से,
आओ मनाये एक नयी दीवाली,
एक नयी सोच के आगाज़ से!
