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Ravi Ranjan Goswami

Abstract

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Ravi Ranjan Goswami

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नये उपमान

नये उपमान

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गम गुंडे हैं

खुशी नायिका।


सुख है एक फकीर।

गुंडे को पर पीर सुहाती।


खुशी नायिका मदमाती।

सुख फकीर मर्जी का मालिक।


उसे सुसंगति ही भाती।


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