STORYMIRROR

Ravi Ranjan Goswami

Abstract

3  

Ravi Ranjan Goswami

Abstract

नये उपमान

नये उपमान

1 min
143

गम गुंडे हैं

खुशी नायिका।


सुख है एक फकीर।

गुंडे को पर पीर सुहाती।


खुशी नायिका मदमाती।

सुख फकीर मर्जी का मालिक।


उसे सुसंगति ही भाती।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract