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Ambika Nanda

Abstract

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Ambika Nanda

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नया साल

नया साल

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तारीखें बदलती हैं,

बदलता है केलैंडर,

या फिर बारह महीनों में,

रिश्तों के पेमाने भी बदल जाते हैं ?


कभी,किनही सालों में,

कुछ रिश्ते भी बदल जाते हैं।

खा जाती है जब स्वार्थ की दीमकl

उस साल रिश्ते खुद ब खुद दरक जाते हैं।


फलने फुलने लगते हैं वह,

जो बनधनों से परे रह जाते हैं।

साथ चलते रहें बस,

चुनिंदा कुछ लोग,

चाहे केलैंडरों पर लिखे साल बदल जाते हो।


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