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Arti Tiwari

Inspirational

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Arti Tiwari

Inspirational

"नया साल"

"नया साल"

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इस साल फिर

बिखेर दूंगी उम्मीदों के बीज

कामनाओं के जंगल में

शायद कुछ नमी बची रह जाये

धरती की कोख में

और अँखुआ जायें

मेरी कुछ कामनायें

प्रार्थनाओं और शुभकामनाओं के

पानी से सिंचित ले लें फूटन

आ जायें फोड़ कर जमीन का सीना

वो चिर-प्रतीक्षित लाल लाल कोंपले

मेरे आँचल से छन छन कर

रोशनी के वृत और हम सबकी

उत्सर्जित कार्बनडाईऑक्साइड

दे दे इतनी ऊर्जा

जो ज़रूरी है जीवन में

प्रकाश संश्लेषण के लिए

मुझे विषवास है इसी से पनपेगा

वो पौधा जिसे पोषने के लिए

पृथ्वी सदियों से लगा रही चक्कर सूर्य के

इसी से हाँ इसी से

आएगी नई सभ्यता

जहाँ थम जायेंगे कत्ले-आम

मिट जायेंगी दुर्भावनाएँ

छल हो जायेंगे ओझल

सारे कांटे हो जायेंगे इकट्ठे

बना लेंगे एक मज़बूत बाड़

जिसे पार कर कोमल फूलों तक

न पहुँच सकेंगी नोचने वाली उँगलियाँ

हाँ मुझे यकीन है

इस बार मेरे बीज

अंकुरित होंगे ज़रूर


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