नव वर्ष तुम कुछ यूँ आना
नव वर्ष तुम कुछ यूँ आना
हे नव वर्ष। तुम कुछ यों आना
रहे न देश में दीन दुखी कोई
सबके चेहरे पर
मुस्कुराहटें लाना
हे नव वर्ष।
तुम कुछ यों आना
खत्म करना विश्व से करोना को
और न विश्व में कोई
महामारी फैलाना
हे नव वर्ष।
तुम कुछ यों आना।
न रहे भूखा - प्यासा कोई सबको मिले
भरपेट खाना
हे नव वर्ष।
तुम को यों आना
खत्म करना सबके दिलों से ईर्ष्या - द्वेष
सब के दिलों में
प्रेम - सौहार्द के फूल खिलाना
हे नव वर्ष।
तुम कुछ यों आना
मिले सबको जिंदगी में मंजिल अपनी
कभी किसी का
दिल न दुखाना
हे नव वर्ष।
तुम कुछ यूं आना
हो जिंदगी में सब की हसरतें पूरी
न रहे किसी की कोई हसरत अधूरी
सब पर अपनी
कृपा बरसाना
हे नव वर्ष।
तुम कुछ यों आना......
