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Vijay Kumari

Abstract

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Vijay Kumari

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नव वर्ष तुम कुछ यूँ आना

नव वर्ष तुम कुछ यूँ आना

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हे नव वर्ष। तुम कुछ यों आना 

रहे न देश में दीन दुखी कोई 

सबके चेहरे पर 

मुस्कुराहटें लाना

हे नव वर्ष। 

तुम कुछ यों आना 

खत्म करना विश्व से करोना को 

और न विश्व में कोई

महामारी फैलाना

हे नव वर्ष। 

तुम कुछ यों आना। 

न रहे भूखा - प्यासा कोई सबको मिले 

भरपेट खाना 

हे नव वर्ष। 

तुम को यों आना 

खत्म करना सबके दिलों से ईर्ष्या - द्वेष 

सब के दिलों में 

प्रेम - सौहार्द के फूल खिलाना 

 हे नव वर्ष।

तुम कुछ यों आना 

मिले सबको जिंदगी में मंजिल अपनी 

कभी किसी का

दिल न दुखाना 

हे नव वर्ष। 

तुम कुछ यूं आना

हो जिंदगी में सब की हसरतें पूरी 

न रहे किसी की कोई हसरत अधूरी

सब पर अपनी

कृपा बरसाना

हे नव वर्ष।

तुम कुछ यों आना......

  


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