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Nitesh Prasad

Abstract

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Nitesh Prasad

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नर नहीं मैं नारी हूँ

नर नहीं मैं नारी हूँ

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नर नहीं मैं नारी हूँ

कब कहाँ कि तुमसे भारी हूँ,

अर्द्धनारीश्वर स्वरूप है शिव का

उनकी मैं आभारी हूँ


नहीं बन सकती बार-बार मैं मीरा

अब गरलपान नहीं जरूरी है 

क्यों दु नित्य अग्निपरीक्षा ?


पुरुषार्थ की भी मर्यादा जरूरी है

बहुत हुआ संघर्ष नारी का

नर की भी शुद्धि जरूरी है

वासना त्यागे,त्यागे मलीन विचार


तब कहीं खिलेगा धरा पर

अर्द्धस्वरूप का आकार।


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