संविधान
संविधान
शिवाजी,संभाजी,फुले और शाहु माहारज के बाद,
भीम ने जगाई हजारों-हजारों सालों बाद.
बहुजनों के लिए एक आशा की किरण,
वेद, माहाभरत,रामायण,अगम सुत्र और पुराण,
त्रिपिटक, बाइबिल,गुरुग्रंथ सहिब और कुराण,
इन ग्रंथो से बढकर हैं बाबासाहेब का ग्रंथ संविधान.
सभी भारतीयों के लिए है, अपना धर्म और धर्म ग्रंथ माहन,
धर्म, धर्मग्रंथ को मानने और पढनेका अधिकार देता हैं संविधान.
विविधता में एकताका ,सहिष्णुता और समता का पाठ पढाता है संविधान,
स्वतंत्रता,न्याय,विचार,विश्वास,श्रध्दा और उपासना ,सहमती,असहमती,
जतानेका अधिकार देता हैं सिर्फ हमारा भारतीय जीवीत संविधान.
राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की शक्ति देता संविधान,
बाहुबली के अत्याचारों का एक मात्र रामबाण उपाय हैं संविधान.
अपने अधिकार और कर्तव्य के प्रावधानों का पुलिंदा हैं संविधान,
देश की एकता और संप्रभुता बनायें रखने का मंत्र है संविधान.
अगर संविधान नहीं होता, तो लोकतंत्र हुआ होता निवर्तमान.
व्यक्ति-स्वातंत्र, न्याय ,समानता के लिए तरसता हमरा वर्तमान.
आज भी हमे करना पडता वेदिक अमानवीय नियमों का पालन,
जारी रहता आज और कल भी मनुस्मृति का काला कानुन.
जिस में धर्म होता सर्वोपरि और सर्वशक्तिमान,
और होता अधर्मी कर्मकांडीयों का सर्वत्र शासन.
धन्य हो सभी शहीद और भीमा का संवैधानिक शासन,
जिसे हम आज कहते है गर्व से अपना लोकतांत्रिक शासन.
संविधान के संवैधानिक सशक्त प्रावधानों के बावजुद,
अनगिनत कमियोंसे चल रहा हैं लोकतांत्रिक शासन.
क्योंकि आज भी नहीं हुई हैं वेदिक विचारधारा निष्प्रान,
पाखंडी धर्मपंडित ,मनुवादि मिटा रहे हैं संस्कृति हर क्षण.
विविधता में एकता, भारतीय संस्कृति का जतन,
सुरक्षित वतन रखने की क्षमता रखता हैं संविधान,
मनुवाद के विरूध्द बहुजनों को युध्द् लडना पडेगा आजीवन,
मनुवाद ऐसी जहरीली बीमारी जो कभी खत्म ना हो आजीवन .
क्योंकि मनुवादी संकट मे करता हैं मत्स्य अवतार धारण,
जब समय हो अनुकुल दिखाता हैं सुअर अवतार का आचरण.
हमारी नैतिक जिम्मेदारी हैं अक्षुण्ण रखना भारतीय संविधान,
क्योंकि जड से मनुवाद मिटाने कि रामबाण औषधि है संविधान.
