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Sunayana Borude

Abstract

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Sunayana Borude

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नकाब

नकाब

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पता नहीं

क्या समझते हैंं

वो हमारे इश्क़ को....

हम दीदार के लिये 

तरस बेठे हैंं

और वो नकाब से करार किये बैठे हैं...

हम तमन्ना करते हैं 

के रुख से कभी नकाब दूर हो

तेरी अदाओ मे डूब जाएं हम

मेरी आशिकी और मशहूर हो..

ओढ कर परदा हुस्न पर

वो कयामत हम पर ढा बेठे हैं..

हम दिदार के लिये तरसे

और वो नकाब से करार किये बैठे हैं।



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