STORYMIRROR

Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

4  

Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

नजरें बता रही है तुम्हें मुझसे

नजरें बता रही है तुम्हें मुझसे

1 min
364

मौसम ये मोहब्बत का बड़ा खुशगवार है।

नजरें बता रही है तुम्हें मुझ से प्यार है।


मसरूफियत ने कर दिया है दूर आज कल।

यादों में तेरे रहना मेरा रोजगार है।


कैसे बताएं हाले दिल कैसी है कैफियत।

मिलने को तुमसे दिल ये मेरा बेकरार है।


क्या होगा आईने की सफाई से बार-बार।

दिल में जफा है चेहरे पे उसके गुबार है। 

 

दिलकशी में हाथ लगाना ना हुस्न को।

होशियार रहना तुम फूलों में खार हैं।


हर बात से वाकिफ है, हर पल से बा खबर 

तू ही मेरे गुनाहों की तो राजदार है।


जीते हैं कैसे लोग यहां क्या कहें सगीर।

छोटी सी जिंदगी है मगर गम हजार हैं।


नजरें बता रही हैं तुम्हें मुझ से प्यार है।

मौसम का भी मिज़ाज बड़ा खुशगवार है।


मसरूफ़ियत ने छीन लिया काम आज कल।

यादों में तेरी रहना मेरा रोज़गार है।


कैसे बताऊँ कितना सताती हैं दूरियाँ ।

मिलने को तुमसे दिल ये मेरा बेकरार है ।


क्या होगा आईने की सफ़ाई से बार-बार।

दिल में ज़फा है चेहरे पे उसके गुबार है.


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance