नगाधिराज हिमालय
नगाधिराज हिमालय
सीमा पर खड़ा शीश उठाकर
गिरिराज हमारा
कोई मौसम हो या कोई परिस्थिति
परिवर्तन से यह
कभी न डरता।
बनकर प्रहरी मेरे भारत की
रक्षा सदा ही यह करता।
पावन गंगा
हिमगिरी से आकर जन-जन की
प्यास बुझाती।
भोले बाबा और माता पार्वती का
निवास बनाकर
सदा आशीष उनका यह पाता।
नगाधिराज हमारा
गर्व से सदा मस्तक ऊँचा रखना
हर वीर सिपाही को सिखलाता।
