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Anil Jaswal

Inspirational

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Anil Jaswal

Inspirational

नदी में जान होती है...।

नदी में जान होती है...।

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हमारा जीवन,

जल पर निर्भर,

वो नदी, नालों और झरनों से मिलता।


पानी के छोटे छोटे स्त्रोत,

इकट्ठे होकर,

एक विशाल,

नदी का रूप ले लेते।


फिर ये नदी,

पहाड़ों की,

गोद से निकलकर,

मैदान में जाती,

एक अल्हड़ मस्त,

जवानी में बहती।


लेकिन हम मैदानी लोग,

बहुत स्वार्थी होते,

नदी का जल,

तो उपयोग कर लेते,

परंतु अपने शहर के,

गंदे नाले,

उसमें डाल देते।

इस बजह से,

जल दुषित हो जाता,

जो भी पीता,

बिमार पड़ जाता,

कई बार,

तो किसी महामारी का,

शिकार तक हो जाता।


सच में,

हर व्यक्ति की जिम्मेदारी,

नदी को साफ रखें,

उसमें कचरा न फेंके।

जो भी फेंके,

उस पर शुल्क लगाया जाए।


जितने भी अग्निवीर हैं,

उनको सेवा निवृत्ति के बाद,

परियावरण सरंक्षण पुलिस बनाकर,

उसमें नियुक्त किया जाए,

हर तालूका में,

एक परियावरण सरंक्षण पुलिस थाना बनाया जाए,

उस इलाके के,

नदी नालों को साफ रखना,

और उनका सरंक्षण रखना,

उसकी जिम्मेदारी स्थापित की जाए।



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