STORYMIRROR

Vrajlal Sapovadia

Abstract Others

4  

Vrajlal Sapovadia

Abstract Others

नाविक

नाविक

1 min
199

नाविक बोला 

मैं ही नाव 

झील और सरोवर भी मैं 

हूँ जल मैं 

मैं हूँ लहरे 

बैठ गया जब एक मुसाफिर 

बन के तानाशाह 

बोला धीरे से 

मैं हूँ छिद्र 

अब नाविक मैं 

लगाम मैं

मैं ही नाव 

झील और सरोवर मैं 

जल भी मैं 

मैं हूँ लहरे 

छिद्र मैं 

नाविक मैं 

जप भला तू राम नाम 

स्वर्ग का खुला है द्वार

जप भला तू राम नाम 

नाविक मैं 

नाव मैं 

डूबेगा तू अकेला 

मैं तो अब नाविक हूँ 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract