Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Arvina Ghalot

Inspirational


4.1  

Arvina Ghalot

Inspirational


नारी

नारी

1 min 372 1 min 372

नारी निज मन की व्यथा कहो आज।

इतिहास के पन्नों से निकलो तो जरा ।


 पन्ना ने लहू के कतरे को बहा सींचा था

 इतिहास आज की नारी तुम याद करो तो जरा।


खून के रिश्ते-नाते कोई आज निभाता नहीं।

दर्द क्या होता है ये तुम पन्ना से पूछो तो जरा।


न भूलो रानी लक्ष्मीबाई सी बलिदानी को 

 याद जुबानी उसकी कहानी हर बच्चे से पूछो तो जरा


अरुणा आसिफ ने हाथों में उठाया था ध्वज ।

 चल रहे थे बहुत से नर नारी देखो तो जरा ।


 जहर का प्याला राणा ने भेजा था 

कान्हा मीरा पी गई देखो तो जरा ।


पद्मावती सुन्दरता की मूरत क्या कसूर था।

जौहर की अग्नि में खुद को झोंक दिया देखो तो जरा।


रजिया तुम भी आज कुछ तो कहो यों चुप ना रहो ।

तुम्हारे सीने में भी दिल था कोमल सा जरा ।


 सीता भी यहां वन वन भटकी रही लव कुश संग।

सच के लिए देनी पड़ी उसे परीक्षा देखो तो जरा।


 सत्यवती जो पति के लिए लड़ी यमराज से ।

बचा लाई प्राणों को उसकी कीमत समझो तो जरा ।


 कृष्ण ने दर्द सुना द्रौपदी का उसकी पुकार सुनकर।

 दौड़े दौड़े आए चीर बढ़ाने को को जरा।


कल्पना तुम जो उड़ी आसमान में हौसलों से।

आज दिलों में हमारे इतिहास बन गई हो जरा।


नारी निज मन की व्यथा कहो आज ।

इतिहास के पन्नों से निकलो तो जरा


Rate this content
Log in

More hindi poem from Arvina Ghalot

Similar hindi poem from Inspirational