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Ramchander Swami

Inspirational

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Ramchander Swami

Inspirational

नारी अबला नहीं सबला है

नारी अबला नहीं सबला है

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नारी अब अबला नहीं, सबला कहलाती है।

चुल्हा -चौकी छोड़ अब अंतरिक्ष में तिरंगा लहराती है ।।


वात्सल्य की मूर्त, सृष्टि की रचयिता कहलाती है।

पुरुष के संग हर क्षेत्र में, अपना दमखम दिखलाती है।।


अब बेचारी नहीं शौर्य की विरांगना कहलाती है।

सीमाओं पर डटकर, दुश्मनों से लोहा लेती है ।।


कर्म क्षेत्र से आसमान में हौसलों की उड़ान भरती है।

शिक्षा की अलख जगाकर नारी शक्ति का परचम फहराती है ।।


आने वाली पीढ़ी को अब तकनीकी ज्ञान सिखाती है।

छोड़ सब खेल खिलौने अब आविष्कारों से परिचय करवाती है।।


दबाकर अपनी ख़्वाहिशें परिवार का रिश्ता बतलाती है।

परिवार की हसरतों को सींचकर, स्त्रीत्व की जिंदादिली दिखलाती है।।


मधुर कंठ कोकिल स्वभाव से मृदुला कहलाती है।

सबकी पालनहार, समरसता के गीत सुनाती है।


नहीं रहती है अब घर में दुबककर आततायियों पर शेर सी दहाड़ती है

नारी अब अबला नहीं सबला है कहलाती है ।।


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