नामुमकिन को मुमकिन बनाएंगे
नामुमकिन को मुमकिन बनाएंगे
किया है मन में ये अटल इरादा हमने,
अपनी मंजिल को तो हम पाकर रहेंगे,
चाहे मुश्किल हो राह भले कितनी ही,
आगे बढ़ना न अब कभी हम छोड़ेंगे।
एक बार जो चल पड़े कदम आगे को,
फिर अब न पीछे मुड़कर हम देखेंगे,
छूना है गर आसमां की बुलंदियों को,
तो फिर गिरने से हम क्यों डरेंगे?
राह रोकना चाहे अगर नाकामियां,
डटकर उनसे हम खूब ही लड़ेंगे,
हों अंधेरे कितने ही राहों में पर,
खुद को हर हाल में संभाल ही लेंगे।
है खुद पर पूरा पूरा ही भरोसा हमें,
हर मुसीबत से अब हम टकरा जाएंगे,
मन में है जब दृढ़ विश्वास की ज्योति,
नामुमकिन को मुमकिन हम बना देंगे।
