STORYMIRROR

Dr Manisha Sharma

Abstract

3  

Dr Manisha Sharma

Abstract

ना करना मोहब्बत

ना करना मोहब्बत

1 min
268

कहा था अंजाम भला नहीं होता 

क्यों ख़ुद से दुश्मनी मोल ली तुमने

जितना सुलझोगे उलझते जाओगे

मोहब्बत से मोहब्बत क्यों की तुमने


ये ऐसी राह है जो मंज़िल नहीं पाती है

जितने फासले हों उतनी ही तड़पाती है

कभी रफ़ीक कभी इबादत बन जाती है 

जीते जी ज़िन्दगी शहादत हो जाती है।


ख़ुद से ग़र मोहब्बत है तो मोहब्बत ना कर

जी ले अपनी ज़िन्दगी तिल तिल के ना मर

अपनी राह अपना सफ़र अपनी मंज़िल बन 

ना हमसफर ख़ोज ना किसी हसीन पे मर। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract