STORYMIRROR

Srishti Sharma

Tragedy

4  

Srishti Sharma

Tragedy

ना आना लाड़ो

ना आना लाड़ो

1 min
222

ना आना लाड़ो

तू इस दुनिया में मत आना,

सुनके कलेजा पसीजता है

रूह कांपती है मेरी

हर दिन रेप की ख़बर

साँसे रोकती है मेरी,

डर लगता है तेरी माँ को

कहीं तेरे संग ना कुछ होजाए

अपनी भूख मिटाने को

वो भेड़िये तुझको ना खा जाए

ना आना लाड़ो

तू इस दुनिया में मत आना!

तेरे ख़र्चे तो उठा लेंगे बाबा तेरे

तुझे सर का ताज भी बनाएंगें

पर इस दुनिया में जानवरों से

तुझे कैसे बचाएंगे?

हर रोज़ जो गंदी नज़रें

तेरे को दूर से छन्नी करती रहेंगी

तुझको इस दुनिया में आने पर

सवाल करती रहेंगी

ना लाड़ो

ना आना लाड़ो

तू इस दुनिया में मत आना!

ना सुन पाएंगे हम

तेरी अस्मत की चीख़

ना देख पाएंगे

तेरी कटी हुई जीभ

अपने घिनोने पाप छुपाने को

वो हर हद्द पार कर जाएंगे

बड़े बड़े लोगों की बातों में आ कर

तुझे ही दोषी ठहराएंगे

ना आना लाड़ो

तू इस दुनिया में मत आना!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy