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Dr Jogender Singh(jogi)

Tragedy

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Dr Jogender Singh(jogi)

Tragedy

मुस्कुराते ज़ख्म

मुस्कुराते ज़ख्म

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नीले/लाल निशान क्या

सिर्फ जिस्म पर बने ?

खाल/मांस के घाव तो भर गए।

भीतर का घाव

भरा या नहीं किसने देखा ?


आंसू सूख गए थे

या पीना सीख लिया था तुमने।

कौन पूछता ?

तुम किसको बताती ?

मारने वाले को ?

तुम पर हंसने वाले को ?

और क्यों बताती ?

फिर मार खाने के लिए।


टूटी हड्डियों के

जुड़ने का वक़्त तय था।

पर टूट जाती कभी भी।

पीकर /होश

खोकर जब भी आया

मारने वाला हिंसक पशु सा।

भीतर भी टूटा कुछ

कभी न जुड़ने के लिए।


कैसे मुस्कुराती हो

ज़ख्म संजोए 

भिन्न भिन्न प्रकार के।

माफ करने की इन्तहा।

ज़ख्मी देवी टूटी /फूटी 

 मगर मुस्कुराती देवी।


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