मुसीबत
मुसीबत
मत घबरा ऐ दिल फंस कर मुसीबत के जाल में,
हम परिन्दे वो हैं जो गुजर चुके हैं पहले भी इस हाल में।
डरते नहीं हम कभी भी मुसीबत के ख्याल से,
कर गुजरते हैं वो कार्य जो हो चाहत के इन्तजार में।
हासिल करना मुमकिन न हो बेशक अगर भी,
हारना सीखा नहीं सुदर्शन किसी भी हाल में।
ढूंढ लेता हूं अपनी मंजिल को खोज कर भी,
छिपी हो चाहे आसमां में या पाताल में।
यूं तो कहने से कुछ हासिल नहीं होता अक्सर,
हम तो दिन रात एक कर देते हैं अपनी मंजिल के ख्याल में।
मुमकिन है हासिल करते करते ही गुजर जाए जिन्दगी
पर पीछे नहीं हटते कभी इरादे मंजिले ख्याल से।
यकीन है कहीं नहीं जाती ईमानदारी व मेहनत की पूंजी
सुदर्शन, फिर क्यों घबराता है लम्बे इन्तजार से।
लेना , देना उपर वाले के हाथों में है आखिर,
पर तू क्यों खफा हो जाता है अपनी सच्ची मेहनत और पगार से।
