डाॅ. बिपिन पाण्डेय
Action
भूल पराक्रम भारत का जब, दुश्मन ने ललकारा है।
उसकी ही भाषा में उसको, दिया जवाब करारा है।
चाहे जितना शक्तिवान हो, फर्क नहीं कोई पड़ता,
दुश्मन को उसके ही घर में, घुसकर हमने मारा है।।
बाल कुंडलिया
गीतिका
गीतिका (ज़िंद...
बता तो दे!
लिपट तिरंगे म...
सरस्वती वंदना
भारत का संविध...
सरस्वती वंदन...
कहमुकरी
प्रेम भक्ति श्रद्धा भी सिखलाया है तुमने कर्म में कर्म परायण बनाया तुमने प्रेम भक्ति श्रद्धा भी सिखलाया है तुमने कर्म में कर्म परायण बनाया तुमने
शिक्षा वह अनमोल रत्न है जो उसके जीवन को नित सुख सुविधा की करते बौछार ...... शिक्षा वह अनमोल रत्न है जो उसके जीवन को नित सुख सुविधा की करते बौछार .......
कबूतर और मेघ प्रियतम के पास संदेश ले जाते। कबूतर और मेघ प्रियतम के पास संदेश ले जाते।
संघर्ष ही जिसके जीवन का सार है बस हैं मुठी भर सी मुश्किलें जिन्हे तोड़ने को तू तैयार ह संघर्ष ही जिसके जीवन का सार है बस हैं मुठी भर सी मुश्किलें जिन्हे तोड़ने को...
दर्द सहते-सहते दिल भी बन गया अब पत्थर है, टटोल कर देख इसे इसका हाल बड़ा बेहाल है। दर्द सहते-सहते दिल भी बन गया अब पत्थर है, टटोल कर देख इसे इसका हाल बड़ा बेहा...
इतनी शिद्दतों बाद भी तेरे दिल के सुल्तान न हुए। इतनी शिद्दतों बाद भी तेरे दिल के सुल्तान न हुए।
पूरी युवा आबादी का पच्चीस फीसदी तकनीकी शिक्षित पूरी युवा आबादी का पच्चीस फीसदी तकनीकी शिक्षित
चलो अब लौट चलें वही नदिया,वही उपवन। चलो अब लौट चलें वही नदिया,वही उपवन।
प्यार सदा तुम सच्चा करना। साथ किसी के मत धोखा करना। प्यार सदा तुम सच्चा करना। साथ किसी के मत धोखा करना।
फिरसे सड़कों पे धूल कम जरूरत ना होने पर चलते जायेगे।। फिरसे सड़कों पे धूल कम जरूरत ना होने पर चलते जायेगे।।
बहु बांध बना रोका जल प्रवाह, नदियों के पथ भी हैं मोड़ दिए। बहु बांध बना रोका जल प्रवाह, नदियों के पथ भी हैं मोड़ दिए।
कवि की कविता वह तलवार की धार है जो बदलाव लाने में एकदम सक्षम है। कवि की कविता वह तलवार की धार है जो बदलाव लाने में एकदम सक्षम है।
बना कर कुछ पद चिन्ह बस गढ़ते जाना है, बना कर कुछ पद चिन्ह बस गढ़ते जाना है,
बंधे है हम सभी उसी, प्रेम के बंधन से, बंधे है हम सभी उसी, प्रेम के बंधन से,
क्योंकि तुम नई इबारत को लिख रही हो सच कितना तुम निखर गई हो ! क्योंकि तुम नई इबारत को लिख रही हो सच कितना तुम निखर गई हो !
स्वार्थ के लिए एक छत के नीचे रहते रिश्ते, क्या नहीं है ये दीया तले अँधेरा ! स्वार्थ के लिए एक छत के नीचे रहते रिश्ते, क्या नहीं है ये दीया तले अँधेरा !
हम कर्मवीर हम कृषक वीर, हम कृषि के रखवाले हैं। हम कर्मवीर हम कृषक वीर, हम कृषि के रखवाले हैं।
पहाड़ संरक्षित प्रकृति पर्यावरण संरक्षित सुरक्षित वर्तमान वविष्य बनाओ। पहाड़ संरक्षित प्रकृति पर्यावरण संरक्षित सुरक्षित वर्तमान वविष्य बनाओ।
और लिखेगी कलम फिर से सुकून और प्रेम भरे कुछ गुनगुनाते गीत। और लिखेगी कलम फिर से सुकून और प्रेम भरे कुछ गुनगुनाते गीत।
पर्यावरण के कर्म धर्म के महायज्ञ शुभारंभ आरम्भ आवश्यक का वर्तमान। पर्यावरण के कर्म धर्म के महायज्ञ शुभारंभ आरम्भ आवश्यक का वर्तमान।