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Shraddhanjali Shukla

Abstract

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Shraddhanjali Shukla

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मुझे गर्व है

मुझे गर्व है

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है गर्व मुझे इस धरती पे,जहाँ लिया है जन्म

पूजा उसको जाता जिसने,यहाँ दिया है जन्म।


सबसे पहले धरती माता, नमन करो स्वीकार

अपनी शरण में जो रखा है, किया बड़ा उपकार।


हरे लहलहाते खेतों में, मैंने काटी हर शाम

अब मेरे जीवन का ए माँ, हर दिन तेरे नाम।


चुका सकूँ कभी जो सुनो माँ, मैं भी अपना कर्ज

आ सकूँ मैं काम धरती के, निभा सकूँ मैं फ़र्ज।


रग रग में मेरे बहता है,भारत माँ का नाम

इसकी पावन मिट्टी में है, मेरे चारों धाम।


भारत माता की जय बोलो,क्या जात और पात

मिल कर रह लो भाई सारे, छोड़ो अब आघात।


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