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Dinesh Dubey

Abstract

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Dinesh Dubey

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मतलब के लिए

मतलब के लिए

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इंसान की फितरत भी

बड़ी अजीब है,

काम बदलता है हरदम,

घर भी बदलता रहता है, 


दोस्त यार तो,आम तौर पर 

रोज ही बदल देता है, 

नौकर बदले गाड़ी बदले,

जैसे कपड़े है बदलता,


वक्त पड़े तो यारो वह 

मां बाप भी बदल देता है,

अपने मतलब के लिए तो

वह भगवान भी बदल देता है।


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