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अमित प्रेमशंकर

Abstract

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अमित प्रेमशंकर

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द केरल स्टोरी

द केरल स्टोरी

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यह प्रेम नहीं एक धोखा है

हर पल तुझे मैंने रोका है

मत जा मत जा मत जा रे तू

मेरी बेटी लौट के आ जा तू


जहां राम कृष्ण का दर ही नहीं

हो सकता कभी मेरा घर वो नहीं

तुम शालिनी हो, ना बन फातिमा

रो-रो कर कहती है तेरी मां

मत जा मत जा मत जा रे तू

मेरी बेटी लौट के आ जा तू।।


माना कि तू है उडनपरी

पर है चिंता तेरी हर घड़ी

ना बनने को तू जा सलमा

तेरे पांव पड़े तेरी बुढ़ी मां

मत जा मत जा मत जा रे तू

मेरी बेटी लौट के आ जा तू।।


तुझपे नींद चैन लुटाए हैं

हर राह में फूल बिछाए हैं 

नकली फूलों की चाह में रे 

तुम कांटों में ना फंसने जा

मत जा मत जा मत जा रे तू

मेरी बेटी लौट के आ जा तू।।


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