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SHUBHAM KUMAR VERMA

Abstract

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SHUBHAM KUMAR VERMA

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यादें पुरानी

यादें पुरानी

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ताल्लुकात तोड़े ज़माने से जिसके लिए।

चला गया वो ताल्लुकात तोड़कर ज़माने के लिए।।


वे वक्त जिसके नाम सारा वक्त किया।

वक्त नहीं अब उसी के पास हमारे लिए।।


हिफाज़त में उसकी साया मेरा हमेशा उसे घेरे रहा।

रूह मेरी तोड़कर चला वो गया, पाने को कुछ पल की आज़ादी के लिए।।


दिल भरने लगा,मन आहें भरने लगा है....... कोई किसी का होता नहीं।

समझ कर कुछ लोगों दिल को खिलौना,आ जाते हैं जज़्बात से खेलने के लिए।।


जिसे भी हमदर्द माना है,हर बार दर्द उसी मिला है।

इतना तो नहीं दुःखा दिल मेरा कभी, अपने ही दर्द के लिए।।


ताल्लुकात तोड़े ज़माने से जिसके लिए।

चला गया वो ताल्लुकात तोड़कर ज़माने के लिए।।


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