मत बतलाओ
मत बतलाओ
मत बतलाओ किसी को कि मैं कमज़ोर हूँ,
प्रश्न बढ़ जाएंगे,
अपने सड़ जाएंगे।
कमज़ोरी से तुम जितना ना घबराए,
उतना दुनिया की बातों से जाओगे।
कमज़ोरी का तोड़ तो लेकर आ गए,
ऐसी गंदगी का तोड़ नहीं ला पाओगे।
हर दर्द का इलाज मिल जाएगा,
पर जुबानों का ज़हर नहीं मिटा पाओगे।
दुनिया को हँसने का साथ चाहिए,
आँसू किसी को पसंद नहीं।
जय जीतने वाले की कही जाती है,
हारने वाले के कोई संग नहीं।
इसलिए चलो, बिना रुके, बिना डरे,
सवालों की भीड़ में खुद को रखो खरे।
निर्बलता के सागर की लहरें,
टकरा कर लौटें संकल्पों के पर्वत से।
लोहे सी निर्बलता तप के भट्टी में,
टकरा सकती है, गलत जगत से।
कह दो तूफ़ानों से कि आँसू नहीं, ये बूंद स्वेद हैं,
मौन रह राह बनाओ, जीत का इक यह भेद है।
