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Neerja Sharma

Abstract


5.0  

Neerja Sharma

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मृत्यु

मृत्यु

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मृत्यु

ऐसा कड़वा सच

जिसे स्वीकारना मुश्किल

नकारना तो है नामुमकिन।

 

मृत्यु

डर कर जीना

है मौत से बदतर

क्यों न डरा कर ही मरें।


मृत्यु

कहना आसान

रूह काँप जाती है

जब मौत सामने आती है।


मृत्यु

समय का पता नहीं

अंदाजा लग ही न पाए

क्या मालूम कब हो दस्तक जाए।


मृत्यु

जिंदा होकर भी 

हर रोज उसकी होती है 

ज़मीर बेचकर जो सोता है।


मृत्यु

गले लगाओ

टाल तो ना पाओगे

तो क्यों न जीओ हँस हँस के।


मृत्यु

यम का बुलावा

बस यही प्रभु प्रार्थना

कुछ कर्म सत कर जाऊँ।


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