मोरी मैया
मोरी मैया
भगवान की बन भक्तिन, विष्णु कृपा आई
हरि की वह बनी पत्नी, प्रभु कृपा पाई।
मोरी मैया को सबन, बोलत तेज भाई
मैया बोलत को लाभ, घर न सवार पाई।
कमी पढ़त पाइ मैया, ज्ञान लाभ उठाई
मैया मैया से सीख, संस्कार निभा पाई।
सोचत पैसा खूब भय, सबै करत बड़ाई
सच कहूं जितनी चादर, उतनि पैर पसाई।
