STORYMIRROR

कल्पना रामानी

Abstract Inspirational

4  

कल्पना रामानी

Abstract Inspirational

मंजिलें आगे खड़ी हैं

मंजिलें आगे खड़ी हैं

1 min
369


मंज़िलें आगे खड़ी हैं

चल पड़ें रुकना नहीं।

मुश्किलों के खौफ से

पीछे हटें अच्छा नहीं।


राह जो बाधा बने

उस पर विजय पुल बाँध लें 

जो इरादों पर अटल है

वो कभी हारा नहीं।


कोसते हैं भाग्य को जो

कर्म से मुँह मोड़कर

फल की चाहत किसलिए

जब बीज ही बोया नहीं। 


व्यर्थ पिंजर में पड़े जो

पर कटे पंछी बने 

क्यों मिले आकाश जब

उड़ना कभी चाहा नहीं।

 

ज़िक्र उसका अंजुमन में

किस तरह होगा भला।

जब गजल का व्याकरण ही

आज तक सीखा नहीं। 


ज़िंदगी का राज़ क्या है

क्या करेंगे जानकर

क्यों मिला मानुष जनम

जब राज़ यह जाना नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract