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Sachin Kapoor

Inspirational


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Sachin Kapoor

Inspirational


मंजिल

मंजिल

1 min 312 1 min 312

सपनों का टूट जाना

टूट कर बिखर जाना 

किरचा किरचा कर

खुद को समेटना।


और फिर चल पड़ना

उसी राह पर

आंखों में पहले सी 

उम्मीद लिए। 


नया विश्वास लिए 

इक दिन हर दूरी

तय हो जाती है

मंजिल मिल ही जाती है। 


हौसलों के आगे हमेशा 

मुश्किलें हार जाती हैं। 


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