STORYMIRROR

Anita Mishra

Abstract

4  

Anita Mishra

Abstract

मन से मन तक

मन से मन तक

1 min
442

तुम भी मौन मैं भी मौन,

फिर भी दोनों के हृदय में स्पंदन हो।


तुम मत सोचो न मैं सोचूँ,

फिर भी भावों का संगम हो।


मैं हूँ दूर तुम भी दूर ,

मिलन की बस तड़पन हो।


तुम मत गाओ नहीं मैं गाऊँ,

फिर भी सुरों का नर्तन हो।


इस बसन्त में आज है कहना,

मन से मन का बंधन हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract