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Anita Mishra

Abstract

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Anita Mishra

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मन से मन तक

मन से मन तक

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तुम भी मौन मैं भी मौन,

फिर भी दोनों के हृदय में स्पंदन हो।


तुम मत सोचो न मैं सोचूँ,

फिर भी भावों का संगम हो।


मैं हूँ दूर तुम भी दूर ,

मिलन की बस तड़पन हो।


तुम मत गाओ नहीं मैं गाऊँ,

फिर भी सुरों का नर्तन हो।


इस बसन्त में आज है कहना,

मन से मन का बंधन हो।


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