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BHAVANA AHUJA

Abstract

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BHAVANA AHUJA

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मन रूपी रावण

मन रूपी रावण

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आओ आज मन रूपी

रावण का विनाश करें,

कुछ आज सोचे,

कुछ आज करे !


कोई ऐसा मानव नहीं

जिसमें यह मौजूद नहीं,

जलने से वो नश्वर न होता,

मिटता उसका वजूद नहीं !


कभी गरीबी, कभी अत्याचार,

कभी भ्रष्टाचार का रूप लेकर,

धधकता रहता वो

पुनः पुनः जन्म लेकर !


विनाश होगा उसका जब खुद में

बसे उसके रूप को मिटाओगे,

मोक्ष मिलेगा उसको जब

तुम यह सिद्धि पाओगे !


आओ ज्ञान के दीप जलाएं,

उठे पर अब उसे जलाने से पहले,

झूठ, कपट, असत्य को त्यागकर,

सद्भावों का गहना पहने !


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