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Dr Mahima Singh

Tragedy

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Dr Mahima Singh

Tragedy

मन की बात

मन की बात

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मन की बात भूले से ना बांट लेना,

जो आपने बांट ली किसी से मन की बात ,

बस तभी से वो हो गई आम।

अब राज रखने के हुनर फना हो गए हैं।

आज कल चलन हो गया है यही! 

कि बस चाहिए और चाहिए देना कोई जानता नहीं,

बस मांगना आता है सभी को ,

और चोट पहुंचाना आता है ।

धोखा देना आता है,

जानो हवा ही कुछ लोगों ने विषैली कर दी है ,

साथ बैठकर हंसते बोलते हैं छलने का करते हैं इंतजार ।

क्या कहें टीस है बहुत भारी ,

अपने ही अपना बन के छले हैं,

और फरेबी मित्रों ने तो वह कहर ढाये हैं,

जिन्हें अल्फाजों में कहना भी नामुमकिन है।

अच्छे लोग चुप हैं,

इसलिए बुरे लोगों का कहर जारी है।

इसीलिए भीड़ में भी हर इंसान अकेला है।

हर मुस्कान एक छलावा है

दर्द को छुपाने का हसीन अंदाज निराला है।



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